इज़्ज़त की जगह
दूसरों के बीच जगह बनाने का सिर्फ़ एक ही राज़ है—आप उनकी ज़रूरत बन जाएँ। अगर आप दूसरों को यक़ीन दिला दें कि आप उनके लिए ज़रूरी हैं, तो उनके लिए आपको नज़र-अंदाज़ करना नामुमकिन हो जाएगा।
एक पढ़े-लिखे नौजवान की शादी हुई। जब उसकी बीवी आई, तो वह रूप-रंग के मामले में घरवालों के मापदंड पर खरी नहीं उतरी। इस वजह से नौजवान की बहनों ने उसे नापसंद कर दिया। हर कोई उसे घृणा की नज़र से देखने लगा। सबके लिए वह एक अनचाही चीज़ की तरह बन गई, जो बेमतलब घर में आ गई थी।
चूँकि औरत दिखने में ज़्यादा सुंदर नहीं थी, मगर वह समझदार और अक़्लमंद थी। उसने लोगों के बरताव का बुरा नहीं माना। वह जानती थी कि रूप-रंग तो वक़्त के साथ फीके पड़ जाते हैं, लेकिन इंसान के काम हमेशा याद रहते हैं। उसने ठान लिया कि अगर वह रूप से घरवालों की प्यारी नहीं बन सकती, तो अपने कामों से उनकी दिलदार बनेगी।
चुपचाप उसने घर के सारे काम सँभाल लिये। घर की देखभाल, मेहमानों की ख़िदमत, रसोई का इंतज़ाम और बिना कहे ही सबकी ज़रूरतें पूरी करना—यह उसका रोज़ का रूटीन बन गया। उसने हर घरेलू काम को अपना फ़र्ज़ समझ लिया, चाहे उसे करने को कहा गया हो या नहीं।
औरत ने मुँह से कुछ नहीं कहा और न ही किसी की बात का जवाब दिया। उसने अपना सारा ध्यान सिर्फ़ अपने काम पर लगा दिया। नतीजा यह हुआ कि घर का माहौल बहुत जल्द बदलने लगा। हालत यहाँ तक पहुँची कि जिस घर में वह एक अनचाही शख़्सियत थी, वहाँ वह सबकी सबसे चाहती हुई और प्यारी इंसान बन गई।
यही ज़िंदगी का राज़ है। चाहे घर का मामला हो, समाज का या पूरे देश का—इज़्ज़त की जगह पाने का एकमात्र पक्का तरीक़ा यह है कि आप साबित कर दें कि आप लोगों के काम के हैं और लोग न सिर्फ़ आपको इज़्ज़त देंगे, बल्कि आपके मुरीद बन जाएँगे।
