मनुष्य की क्षमता का मूल्यांकन
मनुष्य जो कुछ भी अनुभव करता है, वह इस बात की परीक्षा है कि वह विभिन्न परिस्थितियों पर कैसी प्रतिक्रिया करता है। इन्हीं प्रतिक्रियाओं के आधार पर यह तय किया जाएगा कि वह जन्नत के योग्य है या जहन्नम के।
मनुष्य को पूर्ण स्वतंत्र इच्छा दी गई है, लेकिन किसी भी कार्य को घटित करने की शक्ति केवल ईश्वर के पास है। मनुष्य को पृथ्वी पर केवल परीक्षा के लिए रखा गया है। विभिन्न परिस्थितियों में उसकी प्रतिक्रियाओं की जाँच की जा रही है।
कुछ लोग घटनाओं पर धैर्य, न्याय और विवेक के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। उनके ये कर्म उन्हें सम्मान और सफलता दिलाते हैं। कुछ लोग इसके विपरीत व्यवहार करते हैं। उनका आवेश, क्रूरता और सत्य के प्रति अंधापन उनके लिए केवल दोष और अपराध का कारण बनता है। कुछ लोग अपने को ईमान वाला कहते हैं, लेकिन यदि वे दूसरों के प्रति तिरस्कारपूर्ण, छलपूर्ण और द्वेषपूर्ण रवैया अपनाते हैं, तो उनका दावा तुरंत झूठा सिद्ध हो जाता है। ईश्वर विशेष रूप से उनकी सहायता करता है, जिन पर अन्याय किया जाता है।
कुछ लोग सत्य पर होते हुए भी असहाय और अकेले छोड़ दिए जाते हैं, जबकि कुछ लोग सत्य के प्रति अंधे होते हुए भी संसार की हर तरह की सुविधाओं से घिरे रहते हैं। यह स्थिति ऊपर से विरोधाभासी लगती है, पर इसका एक गहरा उद्देश्य है। इसके माध्यम से उन लोगों की पहचान हो जाती है जो केवल बाहरी चमक-दमक से जुड़े रहते हैं और वास्तव में सच्चाई को नकारने वालों की श्रेणी में आ जाते हैं।
मनुष्य जो कुछ भी अनुभव करता है—चाहे वह धन हो या निर्धनता, सफलता हो या असफलता—सब कुछ परीक्षा है। सांसारिक विजय आनंद का कारण नहीं होनी चाहिए और न ही सांसारिक हानि शोक का कारण। विजेता और पराजित दोनों की परीक्षा हो रही है कि वे अपनी स्थिति पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। इन्हीं प्रतिक्रियाओं के आधार पर यह तय होगा कि वे जन्नत के योग्य हैं या जहन्नम के।
