मनुष्य की परीक्षा
इस संसार में मनुष्य का जीवन एक लंबी परीक्षा है। हर व्यक्ति परीक्षा में है; अंतर केवल इतना है कि यह परीक्षा जिन परिस्थितियों में ली जा रही है, वे अलग-अलग हैं।
जीवन एक निरंतर चलने वाली परीक्षा है। यह एक बड़ा विरोधाभास है कि कुछ लोग जीवन का आनंद लेते हैं, जबकि कुछ लोग निरंतर कष्ट में रहते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि सभी एक ही स्थिति में हैं, क्योंकि उन्हें जिन परिस्थितियों में रखा गया है, उनमें उनके कर्मों और उनकी प्रतिक्रियाओं की जाँच की जा रही है। हर व्यक्ति परीक्षा में है; अंतर केवल परीक्षा की परिस्थितियों का है।
मनुष्य की परीक्षा का एक अन्य पहलू यह है कि ईश्वर ने कुछ को कमज़ोर और दूसरों को शक्तिशाली बनाया है। यहाँ हमेशा शक्तिशाली के आगे झुक जाने और कमज़ोर का शोषण करने का प्रलोभन (लालच) बना रहता है। लेकिन ऐसा करना जहन्नम की ओर जाने का सबसे सुनिश्चित रास्ता है। केवल वही लोग जन्नत के योग्य सिद्ध होंगे, जो परिस्थितियों की परवाह किए बिना यह पहचानते हैं कि सही क्या है। क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि जो कमज़ोर दिखाई देता है, वही सही होता है और जो शक्तिशाली होता है, वही ग़लत।
दूसरे लोग चाहे कितना ही परेशान करने वाला व्यवहार क्यों न करें, सही प्रतिक्रिया यही है कि नरमी और समझदारी से काम लिया जाए। सामने वाला चाहे कितना भी भड़काने की कोशिश करे, इंसान को इंसाफ और निष्पक्षता का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए।
इंसान अपनी ज़िंदगी के हालात में जैसा बर्ताव करता है, वही तय करेगा कि मौत के बाद उसका ठिकाना कहाँ होगा। जो लोग ताक़तवर के सामने दब जाते हैं और कमज़ोरों पर ज़ुल्म करते हैं, वे जहन्नम की आग में जाएँगे। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि हर दिन उनके पास दो रास्ते होते हैं—एक रास्ता जहन्नम की ओर ले जाता है और दूसरा जन्नत की ओर।
