मनुष्य की खोज
मनुष्य का जीवन दो चरणों में बँटा है—मृत्यु से पहले का समय परीक्षा का है और मृत्यु के बाद का समय पुरस्कार या दंड का। इस सत्य को स्वीकार करके ही मनुष्य सच्ची सफलता प्राप्त कर सकता है।
मनुष्य के मस्तिष्क में लगभग सौ अरब तंत्रिका कोशिकाएँ (one hundred billion nerve cells) होती हैं। यह आश्चर्यजनक तथ्य इस बात का संकेत है कि मनुष्य के पालनहार ने उसके भीतर अपार क्षमताएँ रखी हैं।
इसके साथ ही मनुष्य को एक ऐसी विशेष क्षमता दी गई है, जो इस विशाल ब्रह्मांड में किसी और प्राणी को नहीं मिली—सुख और आनंद को गहराई से महसूस करने और उसका आनंद लेने की क्षमता।पूरे ब्रह्मांड में मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो आनंद को गहराई से समझ सकता है और पूरी तरह महसूस कर सकता है। मनुष्य के लिए लगभग हर चीज़ आनंद का कारण बन सकती है।
ईश्वर ने मनुष्य को अनोखी क्षमताओं के साथ पैदा किया है। और ईश्वर ने एक अत्यंत सुंदर संसार भी बनाया है, जिसे जन्नत कहा जाता है। जन्नत एक पूर्ण संसार है, जहाँ हर प्रकार का आनंद अपने सर्वोत्तम रूप में मौजूद होगा। मानो मनुष्य और जन्नत एक-दूसरे के पूरक हों। मनुष्य जन्नत के लिए है और जन्नत मनुष्य के लिए है। जन्नत वह स्थान है जहाँ मनुष्य को पूर्ण तृप्ति प्राप्त होगी। इस प्रकार जन्नत वह स्थान है जहाँ मानव स्वभाव अपनी परिपूर्णता को प्राप्त करता है। जन्नत के बिना मनुष्य अर्थहीन है और मनुष्य के बिना जन्नत भी अर्थहीन है। जन्नत के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा है और मनुष्य के बिना जन्नत भी अधूरी है।
मनुष्य जन्नत का संभावित निवासी है, किंतु कोई भी व्यक्ति जन्नत को जन्मसिद्ध अधिकार के रूप में या किसी विशेष सामाजिक समूह का सदस्य होने के कारण प्राप्त नहीं करेगा। जन्नत में प्रवेश की शर्त यह है कि मनुष्य इस संसार में, जो परीक्षा का संसार है, अपने भीतर ऐसे गुण विकसित करे, जिनके आधार पर वह इसके योग्य सिद्ध हो सके।
ईश्वर ने इसी उद्देश्य के लिए वर्तमान संसार को बनाया है। यह एक चयन-स्थल (selection ground) है। इस संसार की परिस्थितियाँ ऐसी बनाई गई हैं कि यहाँ की हर चीज़ मनुष्य के लिए एक परीक्षा-पत्र है। यहाँ हर क्षण मनुष्य की परीक्षा हो रही है। ईश्वर यहाँ प्रत्येक व्यक्ति के हर शब्द और हर कर्म का लेखा-जोखा तैयार कर रहा है। इसी अभिलेख के आधार पर क़यामत के दिन यह फ़ैसला किया जाएगा कि कौन जन्नत में बसने के योग्य है और कौन नहीं।
इस संसार में मनुष्य को पूर्ण स्वतंत्रता दी गई है। किंतु यह स्वतंत्रता कोई पुरस्कार नहीं है। बल्कि यह परीक्षा के लिए दी गई है। ईश्वर देख रहा है कि मनुष्य अपनी स्वतंत्रता का उपयोग किस प्रकार करता है। ईश्वर की सृष्टि-निर्माण योजना के अंतर्गत, जो लोग अपनी स्वतंत्रता का सही उपयोग करेंगे, उन्हें जन्नत में बसने के लिए चुन लिया जाएगा। और जो लोग अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करेंगे, वे क़यामत के दिन अस्वीकार किए जाएँगे।
मनुष्य का जीवन दो अवधियों में विभाजित है—मृत्यु से पूर्व की अवधि और मृत्यु के बाद की अवधि। मृत्यु से पूर्व की अवधि परीक्षा की अवधि है, और मृत्यु के बाद की अवधि पुरस्कार की अवधि है। मनुष्य की सफलता या विफलता का रहस्य इस सत्य को जानने और इंसान की कामयाबी का दारोमदार इस हकीकत को पहचानने और इसी नज़रिए के साथ अपनी ज़िंदगी बसर करने पर है।
